क्या आप जानते हैं, एक राजा जिसने England में पढ़ाई की, London की गलियां देखीं, पर जब अपने देश में शहर बसाया तो उसे London नहीं, गुजरात जैसा नाम दिया? और एक ऐसा भी देश है, जो अपने अस्तित्व का श्रेय ही एक गुजराती को देता है। आप सोच रहे होंगे मैं US की बात कर रही हूँ, UK की या फिर केन्या की? जी नहीं, यह वो देश है जहाँ आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गए हैं – Indonesia।
इस यात्रा में भारत-Indonesia की दोस्ती का Bridge बना गुजरात। PM मोदी ने वहाँ बताया कि सदियों पहले हमारे व्यापारी और सूफी संत वहाँ गए थे, और आज भी Indonesia के कपड़ों में ‘पटोला’ और ‘बातिक’ प्रिंट की झलक मिलती है। पर क्या आपको पता है, वहाँ की सिविलाइजेशन की नींव एक गुजराती राजकुमार ने रखी थी?
Indonesia की मशहूर किताब ‘Babad Tanah Java’ के अनुसार, ईस्वी सन् 75 में एक गुजराती राजकुमार, ‘अजी साका’, समुद्र पार करके Java द्वीप पहुँचे थे। उन्होंने न सिर्फ वहाँ सभ्यता बसाई, बल्कि ‘साका कैलेंडर’ और ‘हना-चाराका’ लिपि भी Introduce की। ये वही Java द्वीप है, जिसे आज सभी लोग Indonesia नाम से जानते हैं।
आज भी वहाँ की संस्कृति में गुजरात का असर साफ़ दिखता है। सदियों बाद भी इस देश की Culture, Festivals, Traditions और Folk Dance में गुजराती टच देखने को मिलता है। जैसे हमारे कच्छ में ‘वाहनवती माता’ की पूजा होती है, वैसे ही Indonesia में समुद्र की देवी पूजी जाती हैं। उनके Folk Dance हमारे ‘रास गरबा’ जैसे हैं और उनकी कठपुतलियाँ बिल्कुल हमारे कच्छी ‘कठपुतली’ शो जैसी। यहाँ तक कि Indonesia में भी ‘उत्तरायण’ यानी Kite Festivals मनाया जाता है। इस ‘उत्तरायण’ के ज़रिए Indonesians हिंदू देवी-देवताओं को ‘Thank You Note’ भेजते हैं।
लेकिन ये कनेक्शन सिर्फ Indonesia तक नहीं है। Thailand में एक शहर है ‘सूरत थानी’। ‘सूरत’ तो हमारे गुजरात का शहर है ही, और ‘थानी’ का मतलब संस्कृत में ‘स्थान’ होता है। जैसे हमारे गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में ‘थान’ नाम का गाँव है, जो सिरेमिक्स के लिए काफी फेमस है।
इस सूरत थानी का इतिहास भी बड़ा दिलचस्प है। Thailand के राजा वाजीरावुध (Rama VI) ने इस शहर का नामकरण किया था। पहले इस शहर का नाम ‘बान डॉन’ था, जिसे बदलकर उन्होंने 1915 में ‘सूरत थानी’ रख दिया।
एक थ्योरी के अनुसार, इस सूरत नाम की इंस्पिरेशन संस्कृत शब्द ‘सुर-राष्ट्र’ से आई है, जिसका अर्थ होता है, ‘अच्छे लोगों का देश’, ठीक हमारे गुजरात के ‘सौराष्ट्र’ की तरह। इस प्रकार दोनों ही स्थितियों में Thailand के इस शहर सूरत थानी का, गुजरात से सीधा कनेक्शन दिखाई देता है।
लेकिन, राजा वाजीरावुध का गुजरात के लिए प्रेम शायद थोड़ा विशेष था। क्योंकि सूरत थानी जिस नदी के किनारे बसा है, उस नदी का नाम भी उन्होंने ‘फुम दुआंग’ से बदलकर ‘तापी’ (Tapee) रख दिया। बिल्कुल हमारे गुजरात के सूरत और तापी नदी की तरह।
अब ज़रा राजा वाजीरावुध का बैकग्राउंड देखिए। उन्होंने Britain के Royal Military College और उसके बाद Oxford के ‘क्राइस्ट चर्च’ में Education ली थी। उन्होंने London जैसा आधुनिक शहर देखा था, वो Great Britain में रहे, और यह वो दौर था जब British Culture को दुनिया का सबसे Influential Culture माना जाता था। इसके बावजूद, Thailand लौटकर उन्होंने अपने देश के किसी शहर का नाम ‘London’ या किसी नदी का नाम ‘Thames’ रखने के बजाय ‘सूरत’ और ‘तापी’ नाम चुने। यह बात साफ़ दर्शाती है कि हमारा गुजरात Culture, Heritage और Economy के नज़रिए से उस दौर में कितना समृद्ध और ताकतवर रहा होगा।
तो यहाँ बात सिर्फ इतनी सी है कि गुजरातियों ने केवल USA, UK और Africa को ही नहीं, बल्कि पूरे South-East Asia को भी गहराई से प्रभावित किया है, जिसकी छाप आज तक वहाँ ज़िंदा है।





