India Australia Uranium Deal

Australia India Uranium Deal: 20 साल बाद भारत को यूरेनियम क्यों देगा ऑस्ट्रेलिया?

Summary
करीब दो दशकों तक NPT का सदस्य न होने की वजह से ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार किया। लेकिन अब रणनीतिक साझेदारी, बढ़ते भरोसे और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच ऑस्ट्रेलिया ने अपनी नीति बदल दी है।

भारत को करीब 20 साल तक यूरेनियम बेचने से इनकार करने वाला ऑस्ट्रेलिया आखिरकार अब यूरेनियम देने वाला है। और यह वही काम है, जो दो दशकों तक सरकारें नहीं कर पाईं, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संभव हुआ है।

मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक यूरेनियम समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया अब भारत को सिर्फ शांतिपूर्ण नागरिक परमाणु कार्यक्रम के लिए यूरेनियम की आपूर्ति करेगा, जिसकी निगरानी IAEA करेगा।

यह समझौता इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि भारत आज भी Nuclear Non-Proliferation Treaty (NPT) का सदस्य नहीं है। यही वजह थी कि पिछले करीब 20 वर्षों तक ऑस्ट्रेलिया लगातार भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार करता रहा।

इसकी शुरुआत 2006 में हुई, जब भारत-अमेरिका सिविल न्यूक्लियर डील के बाद भी ऑस्ट्रेलिया ने साफ कह दिया कि वह सिर्फ NPT पर हस्ताक्षर करने वाले देशों को ही यूरेनियम बेचेगा। दिलचस्प बात यह रही कि उसी दौरान ऑस्ट्रेलिया चीन को यूरेनियम निर्यात की दिशा में आगे बढ़ रहा था, क्योंकि चीन NPT का सदस्य था।

2008 में लेबर सरकार के सत्ता में आने के बाद उसका रुख और सख्त हो गया। विदेश मंत्री स्टीफन स्मिथ ने भारत के विशेष दूत श्याम सरन से साफ कहा कि NPT पर हस्ताक्षर किए बिना यूरेनियम का निर्यात संभव नहीं है। 2010 में भी, जब भारत-अमेरिका परमाणु समझौता लागू हो चुका था, तब भी व्यापार मंत्री साइमन क्रीन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की नीति बदलने की कोई संभावना नहीं है।

लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। भारत आज भी NPT से बाहर है, फिर भी ऑस्ट्रेलिया ने अपनी दो दशक पुरानी नीति बदल दी। इसकी वजह सिर्फ ऊर्जा नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बना रणनीतिक विश्वास है। रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, क्रिटिकल मिनरल्स, टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक में सहयोग ने दोनों देशों को Comprehensive Strategic Partnership तक पहुंचाया है।

दुनिया के लगभग 28 प्रतिशत ज्ञात यूरेनियम भंडार रखने वाला ऑस्ट्रेलिया अब भारत के 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य में अहम भागीदार बनेगा। यानी यह सिर्फ यूरेनियम की डील नहीं, बल्कि दो दशकों की कूटनीतिक बाधा को तोड़कर भारत की बढ़ती वैश्विक रणनीतिक ताकत की कहानी है।

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