सुप्रीम कोर्ट ने जिहादी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से मना किया तो उनके हमदर्दों का विलाप भी शुरू हो गया। पूरा, नक्सली, जिहादी गिरोह इन देशद्रोहियों को क्रांतिकारी सिद्ध करने लगा।
आरफ़ा ख़ानम शेरवानी द्वारा दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मास्टर माइंड और नॉर्थ ईस्ट और कश्मीर को भारत से अलग करने वाले जहरीले भाषण देने वाले जिहादियों को विक्टिम साबित करने का प्रयास किया जा रहा है। एक सुनियोजित तरीके से प्रोपगेंडा फैलाया जा रहा है कि उमर खालिद और शरजील इमाम को सरकार का विरोध करने की वजह से जेल में रखा गया है।
शरजील इमाम और उमर खालिद वही जिहादी हैं जिन्हें कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। शरजील ने देश के अलग अलग हिस्सों में जाकर मुस्लिमों को दंगे करने के लिए भड़काया था और चिकन नेक काटकर नॉर्थ ईस्ट को भारत से अलग करने की बात की थी। उमर खालिद ने अफजल गुरु की फांसी पर “अफजल हम शर्मिंदा हैं तेरे कातिल जिंदा हैं” जैसे नारे लगाये थे और कश्मीर के बारे में कहा था कि भारत ने कश्मीर पर कब्जा करके रखा हुआ है और कश्मीरियों को आजादी का हक है।
इन जिहादियों को आरफा The Wire पर अपने शो में भगत सिंह बताती है। एक तरफ भगत सिंह जैसे अमर क्रांतिकारी जो अपने देश के लिए फांसी के फंदे पर झूल गए और दूसरी तरफ ये गद्दार, जो देश में रहकर, देश का खाकर, इसी देश को तोड़ने की बात करते हैं। इनकी तुलना करना भी अपने आप में एक देशद्रोही कृत्य है और आरफा इसे कई बार कर चुकी है।
कल आरफा ने फिर से एक शो किया और उसमें सौरव दास नाम के एक सस्ते पत्रकार को बैठाया। इस शो में आरफा, सौरव दास से शरजील इमाम के चिकन नेक काटने वाले देशविरोधी बयान को डिफेंड करने का तरीका पूछती है? ये अर्बन नक्सली पहले तो शरजील इमाम के मामले की जानकारी ना होने की बात करता है फिर कहता है कि शरजील ने नॉर्थ ईस्ट को भारत से काटने की जो बात की थी वो कोई देशद्रोह नहीं बल्कि एक बेवकूफाना और बचकाना बयान था।
इन बेशर्मों के लिए देश को तोड़ने की बात करना एक बचकानी हरकत हो जाती है लेकिन कुछ हिंदुओं द्वारा क्रिसमस की सजावट बिगाड़ देना देशद्रोह हो जाता है। एक विशेष नारा लगाकर भीड़ में फट जाने वाला तो भटका नौजवान हो जाता है लेकिन जय श्री राम का नारा आतंकी नारा बन जाता है। दरअसल जिहादी तंत्र के Victimhood और Coverup की यह पुरानी तकनीक है। ऐसा करने के पीछे इनका मकसद होता है कि जिहादियों के देश विरोधी कुकृत्यों को इतना Normalize कर दिया जाए कि लोगों को वह बस एक मामूली सी घटना लगने लगे।





