दस वर्ष की एक मुस्लिम बच्ची फातिमा पश्चिम बंगाल के मालदा में अपनी मानसिक रूप से बीमार अम्मी और 6 भाई-बहन के साथ रहती थी। फातिमा के अब्बू का दिल किसी दूसरी मुस्लिम महिला पर आया और उसने अपने 6 बच्चों और एक मानसिक अपंग बीवी को उनके हाल पर छोड़कर दूसरा निकाह कर लिया। फातिमा ही सबसे बड़ी थी और उस पर पूरे घर की जिम्मेदारी आ गई। भीख मांगना, मजदूरी करना, कबाड़ बीनना। दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए वो नन्हीं सी जान दर-दर की ठोकरें खा रही थी।
इसी दौरान ग्रेटर नोएडा में रहने वाले CRPF कांस्टेबल तारिक अनवर और उसकी बीवी रिंपा खातून उसे अपने घर ले आए। वादा किया कि पढ़ाएंगे और ख्याल रखेंगे लेकिन मुस्लिम बच्ची को नौकरानी बना दिया। उससे दिन-रात काम करवाया जाता था।
एक दिन फातिमा से काम के दौरान कुछ चूक हो गई तो दोनों ने उसे इतना मारा कि वो बेहोश हो गई। अस्पताल में झूठ बोला गया कि वो फिसलकर बाथरूम में गिर गई। फातिमा का जब मेडिकल परीक्षण किया गया तो उसमें सब सच सामने आ गया।
मेडिकल रिपोर्ट्स में पता चला कि फातिमा की पसलियां टूटी हुई थी, पैर सूजे हुए थे, सिर को पटका गया था, फातिमा को बहुत बुरी तरह से मारा गया था और कई दिन तक भूखा रखा गया। अब फातिमा वेंटिलेटर पर है और जिंदगी की जंग लड़ रही है। पुलिस ने CRPF कांस्टेबल तारिक और उसकी बीवी रिम्पा खातून को गिरफ्तार कर लिया है। CRPF ने कांस्टेबल तारिक को सस्पेंड भी कर दिया है।
यह घटना 15 जनवरी को हो चुकी थी लेकिन अब जाकर यह बाहर आई है। अब सवाल है कि छोटी-छोटी बातों पर शोर मचाने वाला मुस्लिम समाज आज इस घटना पर चुप्पी साध कर क्यों बैठा हुआ है? जबकि यहां पीड़ित बच्ची खुद एक मुस्लिम है। इस मामले पर जो लोग थोड़ा बहुत बोल भी रहे हैं वो भी मुस्लिम अपराधियों का नाम छुपाकर केवल “CRPF कांस्टेबल” लिख रहे हैं ताकि एक प्रतिष्ठित केंद्रीय बल को बदनाम किया जा सके।




