नई दिल्ली में आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे एक प्रदर्शनकारी से जब मौजूदा शिक्षा प्रणाली की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर सवाल पूछे गए, तो वह कोई स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत नहीं कर सका। इस बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
बातचीत के दौरान प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि देश का शिक्षा तंत्र काफी हद तक भ्रष्ट हो चुका है और इसी कारण वह प्रदर्शन का समर्थन कर रहा है। उसने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई। हालांकि, जब उससे पूछा गया कि इस्तीफे के बाद शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, तो वह कोई स्पष्ट नीति या सुझाव नहीं दे पाया।
प्रदर्शनकारी ने कहा कि यदि नेताओं और राजनेताओं के बच्चे भारत में ही पढ़ाई करें तो उन्हें शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का अंदाजा होगा और सुधार की दिशा में काम होगा। इस पर रिपोर्टर ने सवाल उठाया कि जिस आंदोलन का वह समर्थन कर रहा है, उसके नेतृत्व से जुड़े लोगों पर भी इसी तरह के सवाल उठते रहे हैं।
सवाल सुनते ही बगलें झांकने लगा प्रदर्शनकारी
इसके बाद रिपोर्टर ने कई बार पूछा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए चार-पांच ठोस कदम क्या होने चाहिए। लेकिन प्रदर्शनकारी बार-बार केवल ‘सिस्टम बदलना है’ और ‘शिक्षा व्यवस्था सुधारनी है’ जैसी सामान्य बातें दोहराता रहा। वह यह नहीं बता सका कि सुधार किस प्रकार किए जाएं या कौन-सी नीतियां लागू की जानी चाहिए।
बातचीत के अंतिम चरण में जब रिपोर्टर ने फिर से समाधान बताने को कहा, तो प्रदर्शनकारी कुछ देर चुप रहा और अपना कॉकरोच वाला मास्क ठीक करने लगा। रिपोर्टर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि व्यवस्था बदलने की बात करने वालों के पास यदि समस्याओं के समाधान का स्पष्ट खाका नहीं है, तो आंदोलन के उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि किसी भी आंदोलन की प्रभावशीलता केवल विरोध दर्ज कराने से नहीं, बल्कि उसके साथ पेश किए गए व्यावहारिक और ठोस समाधानों से भी तय होती है।


