लंदन, जिसके बारे में यह दावा किया जाता है कि वहाँ बहुत अधिक विविधता और बहुसंस्कृतिवाद है, वहीं एक आठ साल के हिंदू छात्र को सिर्फ़ इसलिए स्कूल छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, क्योंकि उसने अपने माथे पर तिलक लगाया था। यह घटना विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल से जुड़ी है।
इनसाइट यूके के अनुसार, जब स्कूल के कर्मचारियों ने उस हिंदू बच्चे को तिलक लगाए हुए देखा, तो उन्होंने उससे अनुचित तरीके से तिलक लगाने का कारण पूछा।
अब किसी आठ साल के बच्चे को क्या पता कि वह तिलक क्यों लगाता है? उसे तो बस इतना पता है कि उसकी माँ रोज़ सुबह पूजा करती है और पूजा के बाद प्रसाद देते समय उसके माथे पर तिलक लगा देती है। एक बार किसी ने गांधी जी से भी पूछा था कि आप गले में जंतर क्यों पहनते हैं, तो उन्होंने यही उत्तर दिया था कि यह उनकी माँ को पसंद है, इसमें सवाल-जवाब करने की क्या आवश्यकता है।
कहने का अर्थ यह है कि जब गांधी जी को इसका कारण स्पष्ट नहीं था, तो बेचारे आठ साल के बच्चे को क्या पता होगा कि वह तिलक क्यों लगाता है? लेकिन पूरी दुनिया में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी का ढोल पीटने वाले इंग्लैंड को तो कम से कम यह पता होना चाहिए कि तिलक लगाना एक हिंदू धार्मिक परंपरा है, जो पूरी तरह व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर करता है।
सिर्फ तिलक लगाने के कारण उस आठ साल के हिंदू बच्चे से स्कूल कर्मचारियों ने न केवल पूछताछ की, बल्कि उसे अन्य विद्यार्थियों से अलग भी बैठाया गया। अब किसी आठ साल के बच्चे को यदि आप उसके सहपाठियों से अलग बैठाएँगे, तो वह बच्चा क्या सोचेगा? इससे उसके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
बहरहाल, हमने स्कूल को ईमेल भेजकर इस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी माँगी है। हमने स्कूल से यह भी पूछा है कि उनकी स्कूल की प्रबंध समिति के अध्यक्ष मुनीर अहमद किस देश के नागरिक हैं, क्योंकि यह आशंका भी है कि यदि वे पाकिस्तानी हों, तो जानबूझकर हिंदू बच्चों को निशाना बनाया जा रहा हो। ईमेल में यह सवाल भी किया गया है कि क्या उनके स्कूल में अन्य धर्मों के बच्चों के साथ भी इसी प्रकार की पूछताछ की जाती है?
इन सवालों के उत्तर यदि हमें प्राप्त होते हैं, तो हम आपको अवश्य बताएँगे। लेकिन हिंदू घृणा से भरी यह घटना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि हिंदूफोबिया अब पूरी दुनिया में एक कटु सच्चाई बन चुका है।




