Mossad and Iran

6 घंटे, 24 एजेंट और आधा टन परमाणु सीक्रेट: कैसे मोसाद ने ईरान के घर में घुसकर की सबसे बड़ी चोरी?

Summary
ईरान के भीतर मोसाद के सबसे बड़े ऑपरेशन्स का खुलासा। कैथरीन शकदाम की जासूसी, 6 घंटे में परमाणु फाइलों की चोरी और AI स्निपर गन से मोहसेन फखरीज़ादेह की हत्या की पूरी इनसाइड स्टोरी।

एक महिला जासूस जो ईरान के टॉप जनरल्स की पत्नियों की दोस्त बनी और खामनेई की वेबसाइट पर लेख लिखे। जानिए कैथरीन शकदाम के ‘Deep Cover’ मिशन की वो सच्चाई जिसने ईरानी इंटेलिजेंस को घुटनों पर ला दिया। ईरान के भीतर मोसाद के सबसे बड़े ऑपरेशन्स का खुलासा।

ईरान में मोसाद के ‘Invisible’ शिकारी 

Munich (2005), Operation Finale (2018),The Spy (2019) The Angel (2018)। मोसाद (Mossad) नाम की इजरायली इंटेलिजेंस एजेंसी को लेकर कई रोमांचक फिल्में और वेब सीरीज बनी हैं, जिनमें उनकी दुनिया भर में किए गए सीक्रेट ऑपरेशन्स, जासूसी, टारगेटेड किलिंग्स और हाई-रिस्क मिशन्स को ड्रामेटिक तरीके से दिखाया जाता है। आपने शायद ये फिल्में देखी होंगी, जहां मोसाद के एजेंट्स दुश्मन देशों में घुसपैठ करते हैं, नाजी criminals को पकड़ते हैं या terrorist से बदला लेते हैं। ये कहानियां असली घटनाओं से inspired होती हैं। आज हम आपको इजरायल की इसी एजेंसी, यानी मोसाद के कुछ और कारनामे बताने जा रहे हैं, इसलिए आपको ये वीडीओ end तक देखनी होगी ।

सोचिए, आप एक देश के सबसे पावरफुल इंसान हैं। आपकी सिक्योरिटी के लिए हज़ारों कमांडो तैनात हैं। लेकिन आपकी अपनी official वेबसाइट  पर एक ऐसा बंदा आर्टिकल लिख रहा है, जो असल में आपके कट्टर दुश्मन का जासूस है। इतना ही नहीं, वो जासूस आपकी आर्मी के जनरल्स की पत्नियों से मिल रहा है और उनके घरों की सीक्रेट बातें निकाल रहा है।

यह ईरान के सिक्योरिटी सिस्टम में हुई उस Security Breach की हकीकत है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया। आज हम बताएँगे ईरान के भीतर मोसाद के उन ऑपरेशन्स के बारे में, जो इतने सटीक थे कि ईरान को उनकी भनक तब लगी जब सब कुछ खत्म हो चुका था। 

Catherine Perez Shakdam की एंट्री से लेकर AI-powered Sniper Gun तक, यह एक Invisible War की कहानी है।

कैथरीन पेरेज शकदाम: द परफेक्ट ‘Deep Cover’

Catherine Perez Shakdam – ईरान के सुरक्षा घेरे में सबसे बड़ी सेंध लगाने वाला नाम है । कैथरीन फ्रांस में जन्मी एक यहूदी महिला थी। मोसाद के इस ‘Deep Cover’ मिशन के लिए उन्होंने अपनी पहचान पूरी तरह बदल ली। उन्होंने शिया इस्लाम अपनाया और एक ऐसी जर्नलिस्ट का get up बनाया जो ईरानी Regime की Ideology को सपोर्ट करती थी।

उन्होंने ईरानी सरकार का भरोसा इस कदर जीता, कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की ऑफिशियल वेबसाइट पर उनके 18 आर्टिकल्स पब्लिश हुए। वो ईरान के प्रेसिडेंट इब्राहिम रायसी और कुद्स फोर्स के कमांडर कासिम सुलेमानी जैसे पावरफुल लोगों के करीब पहुँचने में कामयाब रहीं।

कैथरीन का असली काम ‘Human Intelligence’ इकट्ठा करना था। उन्होंने सीनियर मिलिट्री ऑफिसर्स की पत्नियों से दोस्ती की, जिससे उन्हें ऑफ़िसर्स के मूवमेंट, उनके शेड्यूल और सेंसेटिव लोकेशन्स की सटीक जानकारी मिली। जब तक ईरान की खुफिया एजेंसी VAJA को शक हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मोसाद ने उन्हें ज़ाग्रोस पहाड़ियों से हेलीकॉप्टर के ज़रिए Extract कर लिया था।

परमाणु फाइलों की चोरी: 6 घंटे 29 मिनट का ऑपरेशन

मोसाद का सबसे साहसी कारनामा 31 जनवरी 2018 को तेहरान के एक इंडस्ट्रियल इलाके ‘शोराबाड’ में हुआ। ईरान ने अपने पूरे Nuclear Program के कॉन्फिडेंशियल डॉक्युमेंट्स को एक साधारण से दिखने वाले गोदाम (Warehouse) में छिपा दिया था।

मोसाद चीफ Yossi Cohen की लीडरशिप में इस मिशन की प्लानिंग दो साल पहले ही शुरू हो गई थी। उस रात 24 एजेंट्स की एक टीम गोदाम में घुसी। उनके पास स्पेशल टॉर्च थीं जो  जो 3600 डिग्री सेल्सियस के टेम्परेचर पर भारी तिजोरियों को मिनटों में काट सकती थीं।

ठीक 6 घंटे और 29 मिनट के भीतर, उन्होंने 55,000 कागजी फाइलें और 183 CDs चोरी कर लीं, जिनका वजन लगभग आधा टन था। गार्ड्स की शिफ्ट बदलने से दो घंटे पहले ही वे वहां से निकल चुके थे। इस चोरी ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया कि ईरान ‘AMAD Plan’ के तहत गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार बना रहा था।

मोहसेन फखरीज़ादेह: AI और रोबोटिक स्निपर का हमला

27 नवंबर 2020 को ईरान के टॉप न्यूक्लियर साइंटिस्ट Mohsen Fakhrizadeh की हत्या ने वॉरफेयर के तरीके बदल दिए। यह हमला किसी हिट स्क्वाड ने नहीं, बल्कि एक Autonomous AI-powered machine gun ने किया था।

मोसाद ने एक बेल्जियम-मेड FN MAG 7.62mm मशीन गन को एक रोबोटिक ढांचे पर फिट किया था, जिसे टुकड़ों में बांटकर आठ महीने के दौरान ईरान के भीतर तस्करी (Smuggling) किया गया। यह हथियार एक पिकअप ट्रक में छिपाया गया था और Satellite के ज़रिए ऑपरेट हो रहा था।

AI का इस्तेमाल इसलिए किया गया ताकि सैटेलाइट सिग्नल में होने वाली Latency (देरी) के बावजूद निशाना एकदम सटीक रहे।  न्यूक्लियर साइंटिस्ट फखरीज़ादेह की कार पर 15 गोलियां चलीं और उनकी मौत हो गई, जबकि बगल वाली सीट पर बैठी उनकी वाइफ को एक खरोंच तक नहीं आई। हमले के बाद ट्रक में लगे एक्सप्लोसिव्स ने हथियार को डिस्ट्रॉय कर दिया ताकि कोई सबूत न बचे।

गद्दारी और Defections: घर के भेदी

इजरायल की स्ट्रैटेजी का एक बड़ा हिस्सा ईरानी अधिकारियों का Defection (दल बदल) कराना रहा है। जनरल अली-रेजा असगारी, जो ईरान के पूर्व डिप्टी डिफेंस मिनिस्टर थे, 2007 में इस्तांबुल से गायब हो गए। बाद में पता चला कि उन्होंने वेस्ट (West) में शरण ले ली है। असगारी ने सीरिया में ईरान के सीक्रेट न्यूक्लियर प्लांट और हिज़्बुल्ला के नेटवर्क के बारे में ऐसी जानकारी दी, जिसके बेस पर इजरायल ने बाद में एयर स्ट्राइक्स कीं।

इसी तरह, ‘Brain Drain’ स्ट्रैटेजी के तहत मोसाद और CIA ने मिलकर के साइंटिस्ट्स को भी टारगेट किया। इसने ईरानी सुरक्षा तंत्र के भीतर Mistrust और अविश्वास की एक गहरी खाई पैदा कर दी। ऐसी कंडीशन बन गई कि किसी को किसी पर भरोसा ही नहीं रहा..

साइबर युद्ध: Stuxnet और मानवीय घुसपैठ

2010 में नाटांज़ न्यूक्लियर सेंटर पर हुआ Stuxnet वायरस का हमला दुनिया का पहला डिजिटल हथियार माना जाता है। लेकिन यह साइबर हमला एक Human Element के बिना पॉसिबल नहीं था। इसके लिए मोसाद ने एक डच इंजीनियर को रिक्रूट किया था, जिसने एक इन्फेक्टेड USB स्टिक के ज़रिए इस वायरस को Air-gapped सिस्टम में पहुँचाया।

इस वायरस ने न्यूक्लियर सेंट्रीफ्यूज की स्पीड को आउट ऑफ कंट्रोल करके उन्हें फिजिकली तबाह कर दिया, जबकि कंट्रोल रूम में बैठे वैज्ञानिकों को सब कुछ नॉर्मल दिख रहा था। इस एक हमले से ईरान की न्यूक्लियर कैपेसिटी 30% तक कम हो गई।

हालिया संघर्ष: ऑपरेशन राइजिंग लॉयन (2025-2026)

साल 2025 और 2026 के दौरान, यह Proxy War एक ओपन कॉन्फ्लिक्ट में बदल गया। इजरायल ने ‘Operation Rising Lion’ के तहत ईरान के भीतर हमले किए। इसमें मोसाद ने तेहरान के बाहर सीक्रेट ड्रोन बेस सेटअप किए थे, जहाँ से ईरानी मिसाइल ठिकानों को टारगेट किया गया।

फरवरी 2026 में हुए हमलों में, इजरायल और अमेरिका ने जॉइंटली ‘Operation Epic Fury’ के तहत तेहरान के एडमिनिस्ट्रेटिव डिस्ट्रिक्ट्स को निशाना बनाया। इन हमलों ने सीधे लीडरशिप के ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया और ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेईभी इसी तरह के एक हमले में मारे गए। द न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि अमेरिका की एजेंसी CIA ने ईरानी लीडरशिप की एक हाई-लेवल मीटिंग को ट्रैक किया और फिर इजरायल ने टारगेट पर हमला किया।  CIA कई महीनों से खामेनेई की मूवमेंट और घरों पर नजर रख रही थी..

यानी, मोसाद की पकड़ अब केवल इन्फॉर्मेशन हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दुश्मन के घर में घुसकर सीधे Eliminate करने की ताकत भी रखता है।

ईरान के भीतर इजरायली इंटेलिजेंस ऑपरेशन्स का यह सफर साबित करता है कि मॉडर्न वॉर केवल बॉर्डर्स पर नहीं, बल्कि Information और Identity के लेवल पर लड़ा जाता है। कैथरीन शकदाम जैसे जासूसों ने दिखाया कि कल्चरल और आइडियोलॉजिकल छलावा किसी भी दीवार को तोड़ सकता है।

आज ईरान के भीतर अविश्वास का माहौल है। यह एक ऐसा युद्ध है जहाँ जीत हथियारों से ज्यादा Invisible अटैक्स और ‘Pinpoint Intelligence’ से तय हो रही है।

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