पश्चिम बंगाल के इतिहास में यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि बांग्लादेशी खुद सामने आकर कह रहे हैं कि, ‘भैया हम अवैध घुसपैठिए हैं और अब हम अपने मुल्क वापस जाना चाहते हैं क्योंकि इधर भाजपा सरकार आ गई है। इससे पहले कि वो हमें डिटेंशन कैंप में डालें, हम खुद ही पहली फुर्सत में बाइज्जत निकल जाते हैं।’
और लिटरली बंगाल में यही हो रहा है। कोलकाता से लगभग 90 किलोमीटर दूर हकीमपुर में एक BSF चेक-पोस्ट है। यहां पर सैकड़ों की संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए पहुंच रहे हैं। इनके हाथों में बांग्लादेशी डॉक्यूमेंट्स हैं और यही दिखाकर वो वापस जाना चाह रहे हैं। इनमें पुरुष, महिला, बच्चे सब शामिल हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश से आए कई लोगों ने बताया कि वे सालों से Kolkata और Kerala में मजदूरी, Garbage Collection, Domestic Work और रिक्शा चलाने जैसे काम कर रहे थे। कई लोगों ने माना कि वे दलालों की मदद से बॉर्डर पार करके भारत आए थे और उनके पास आधार या वोटर ID जैसे भारतीय डॉक्यूमेंट्स नहीं थे।
खबरों के मुताबिक अवैध घुसपैठियों के मन में यह डर NRC के समय ही शुरू हो गया था और स्थानीय लोगों ने तो यहां तक बताया कि उस समय भी बड़ी संख्या में बांग्लादेशी इसी बॉर्डर से वापस जाते दिखे थे। अब आप सोचिए, ममता बनर्जी क्यों NRC के खिलाफ खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं।
ममता बनर्जी के राज में बंगाल के संसाधनों का दोहन ये अवैध घुसपैठिए कर रहे थे और अब इन अवैध बांग्लादेशियों के बयान, उनके वीडियो इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि क्यों बंगाल की भाजपा सरकार और शुभेंदु अधिकारी ‘Detect, Delete, Deport’ ऑपरेशन चला रहे हैं।
अब सोचिए यह केवल अकेले बंगाल की बात हो रही है। ऐसे ही पूरे देश में ये घुसपैठिए बैठे हुए हैं। साल 2016 में तो राज्यसभा में सरकार ने बताया था कि भारत में लगभग 2 करोड़ बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं और जाहिर सी बात है कि 2016 के बाद से अब तक कितनों ने तो फर्जी काग़ज़ बना लिए होंगे, कितनों के परिवार बढ़ गए होंगे, अब तो इनकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया होगा। जानते हो यह संख्या कितनी बड़ी है? इतनी कि ऑस्ट्रेलिया जैसा एक और देश बस जाए।
अब इस समस्या से निपटने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी नेशनल लेवल पर एक कमेटी बनाई है जो देशभर में घुसपैठियों और कुछ इलाकों में तेजी से बदली डेमोग्राफी पर काम करेगी और फिर इसका इलाज बताएगी।
मेरा सवाल अब उनसे है, जो सालों तक यह कहते रहे कि बंगाल में कोई Bangladeshi नहीं है। हैरानी की बात यह है कि जो भी Illegal Infiltration की बात करता था उसे ये लोग कम्युनल बता देते थे और खासतौर पर बंगाल में अगर कोई यह सवाल उठाता था तो ये नैरेटिव बनाते थे कि भाजपा बंगालियों को बांग्लादेशी बता रही है।
अब बताओ भाई, ये लोग कौन हैं जो खुद ही बिलों से बाहर आ रहे हैं? सोचिए इस देश में ‘कागज नहीं दिखाएंगे’ के नाम पर दंगे तक हुए हैं और अब यही लोग कागज दिखा-दिखाकर बता रहे हैं कि हम बांग्लादेशी हैं और हमें वापस अपने मुल्क जाने दो।





