राजदीप सरदेसाई ने इंडिया टुडे चैनल के डिबेट शो में छत्रपति शिवाजी महाराज को आक्रांता बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल में मराठा यानी शिवाजी महाराज की सेना ने आक्रमण किया था। और इस कड़ी में सिर्फ राजदीप ने ही नहीं बल्कि खुद को इतिहासकार बताने वाली रुचिका शर्मा ने भी आज तक टीवी के डिबेट शो में शिवाजी महाराज को आक्रांता बताने की कोशिश की। कुछ वर्ष पहले ऐसा ही दावा नेशनल हेराल्ड की सम्पादक सुजाता आनंदन ने भी किया था।
दरअसल, NCERT की आठवीं क्लास के हिस्ट्री बुक में अब मुग़ल और इस्लामी आक्रांताओं को महान नहीं बताया जायेगा, जैसा कि अब तक बताया जा रहा था। इस ऐलान के बाद से मुग़लों को अपना बाप मानने वाले पत्रकार और इतिहासकारों की सुलग गयी।
इनको दिक्कत इस बात की है कि मुग़लों को अब विलन क्यों बताया जा रहा है? और अगर उनको विलेन बताया जा रहा है, तो छत्रपति शिवाजी महाराज को भी विलेन बताओ। किसी एक को नायक और किसी एक को खलनायक मत बताओ। अरे भैया जबरदस्ती है क्या? क्या बच्चों का मेला चल रहा है कि बड़े भाई को लॉलीपॉप मिला तो छोटे को भी लॉलीपॉप मिले वरना वो रोने लगेगा?
जिन किताबों को पढ़कर राजदीप खुद को इतिहासकार बता रहे हैं, असल में उसकी कहानी कुछ और ही है। एक सबसे बड़ा फैक्ट बताता हूँ, लेकिन वादा करो हंसोगे नहीं। जिस समय की बात राजदीप और अन्य इतिहासकार कर रहे हैं, कि शिवाजी महाराज ने बंगाल में रेड की थी, असल में वो घटना साल 1744 और 1745 के आस पास की है। और छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु 1680 में हो गई थी।
भाई, ज़रा सा तो इतिहास पलट लेता। लेकिन नहीं। राजदीप को AC में बैठकर अधूरा ज्ञान देना है। असल में जिस वर्ष का ज़िक्र सभी वामपंथी और मुग़लों को अब्बा मानने वाले इतिहासकार कर रहे हैं, वो समय है साल 1742 से 1751 के बीच का, जब मराठा सेना ने मुगलों द्वारा नियुक्त बंगाल के गवर्नर अलीवर्दी खाँ के खिलाफ युद्ध छेड़ा था। तबके बंगाल और अब के बंगाल में फ़र्क़ है। ममता दीदी का बंगाल सिर्फ पश्चिम बंगाल है।
लेकिन 300 वर्ष पहले बंगाल में आज का पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश, बिहार, झारखण्ड और ओडिशा का कुछ हिस्सा भी शामिल था। और इस क्षेत्र में सन 1715 के समझौते के तहत मराठा सेना कोई टैक्स वसूली नहीं करती थी।
महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रकाशित होल्कर घराने के इतिहास से जुड़े आधिकारिक साहित्य के तीसरे खंड में कुछ पुराने पत्र उपलब्ध हैं। सन 1742 का एक पत्र कहता है, कि नानासाहब पेशवा और मल्हार राव होल्कर काशी में ज्ञानवापी पर स्थित विवादित ढांचा गिराकर महादेव का मंदिर बनाने वहां गए थे। स्थानीय हिन्दुओं ने नानासाहब से कहा, कि “आप तो मंदिर बनाकर चले जाओगे लेकिन बाद में आक्रांता मुग़ल हमें मारेंगे”, इसलिए कारसेवा टल गई।
मंदिर तो नहीं बना लेकिन आक्रांता मुग़लों पर धाक जमाने के लिए साल 1743 से तत्कालीन छत्रपति शाहूमहाराज के आदेश पर मराठा सेनाओं ने बंगाल के सूबे से टैक्स वसूल करने के लिए अलीवर्दी खान से 8 वर्षों तक लगातार छोटी- बड़ी लड़ाई की।
इस दौरान एक बार जब अलीवर्दी खान को लगा कि वह हार सकता है, तो उसने मराठा सेनापतियों को संधि करने के लिए बुलाया और धोखे से 22 मराठा सेनापतियों की हत्या कर दी थी। इसके प्रतिशोध में मराठा सेना ने छत्रपति शाहु महाराज के आदेश पर बंगाल का पूरा सूबा हथियाने के लिये रघुजी भोसले के नेतृत्व में युद्ध किया था। मुग़लों के साथ साथ उन्हें आर्थिक मदद करने वाले हर किसी की धुलाई हुई। लेकिन इस युद्ध में मराठा सेना द्वारा आम जनता पर किसी भी प्रकार के अत्याचार किये गये हो, इस बात का कोई भी समकालीन विश्वसनीय सबूत, किसी भी रेकॉर्ड्स में मौजूद नहीं है।
ये सारा नैरेटीव 1904 में प्राप्त हुई एक कविता की पुस्तक के आधार पर चलाया जाता है। इस पुस्तक के लेखक कवि कौन है ये राज भी उसी कवि के साथ चला गया। उस कवि की कोई अन्य कविता किसी को पता तक नहीं है। उस कवि ने 1745 में मराठों द्वारा किए गए बदले की कार्रवाई के दौरान हुए मराठा अत्याचारों का विशेष रूप से वर्णन किया है।
उसी को सत्य मानकर वामपंथी इतिहासकार और पत्रकार कहते रहते हैं कि बंगाल में मराठा सेनाओं ने लूट, बलात्कार और अन्य अत्याचार किये थे। लेकिन वही इतिहासकार ये नहीं बताते कि साल 1751 में अंतिम हार के बाद अलीवर्दी खाँ ने कुरान की कसम खाकर कहा था, कि मराठों के विरुद्ध दुबारा कोई युद्ध नहीं करूँगा।
एक कवि जिसका कोई अता न पता, उसके लिखे गए काव्य को सबूत मान कर मुग़लों को डिफेंड करने वाले पत्रकारों और इतिहासकारों को शिवाजी महाराज की कहानी और मराठा सेनाओं की गौरव गाथा पढ़नी चाहिए। धर्म ही हिंदवी स्वराज की मूलभूत प्रेरणा थी, इस सत्य का स्वीकार करना चाहिए। सभी को हीरो बना दो, या सभी को विलन बना दो, ये तर्क तथ्य के सामने नहीं टिकता।
राजदीप भैया जिस बंगाल के लिए आप इतना उछल रहे हैं उसमें और १८ वी सदी के बंगाल में बहुत फ़र्क़ है। लेकिन आपके मराठी पूर्वजों ने कभी इतिहास में आपकी ससुराल वाले बंगाल पर आक्रमण कर दिया था, ये जानकर यदि आप दुखी हैं और ऐतिहासिक तथ्यों को अनदेखा करके एक तरफ़ा नैरेटिव चलाते हैं , तो आपके प्रति हमें कोई हमदर्दी नहीं है।





