श्रीनगर एयरपोर्ट पर भारतीय सेना के एक अधिकारी और स्पाइसजेट के कई कर्मचारियों के बीच विवाद होता है। बात मारपीट पर आ जाती है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला करते हैं, कर्नल साहब अकेले होते हैं और स्पाइसजेट का पूरा एयरपोर्ट। किसने किसको पहले मारा, ये बहस का विषय है। कौन सही, कौन ग़लत ये कोर्ट का विषय है। लेकिन एक आम ग्राहक के नज़रिए से इस घटना को कैसे देखा जाना चाहिए?
हज़ारों ग्राहक हर रोज़ भारत में एयरलाइंस के शोषण का शिकार होते हैं। कभी अचानक किराया बढ़ेगा, कभी बेवजह फ्लाइट डिले हो जाएगी और कभी लगेज के खोने या मिसहैंडलिंग की शिकायत करो तो इनका स्टाफ़ बदतमीज़ी पर उतर आएगा। और कई साल में कोई एक यात्री अगर इस शोषण से तंग आकर रिएक्ट कर दे तो उसे गुनहगार बता दिया जाएगा। भारत में जनता इन बड़ी प्राइवेट कंपनियों के लिए एक मच्छर से अधिक कुछ नहीं है।
घंटों इनके जहाज़ रनवे पर खड़े रहते हैं और इंडियन मिडल क्लास केवल जल्दी पहुँचने के लिए जहाज़ में बैठना चुनता है। और जब वो पूछता है कि मुझे घर जल्दी जाना था इसलिए आपका इतना महंगा टिकट लिया, तो बेवजह आप देर क्यों कर रहे हैं? तो ये उसे कोई सीधा जवाब देना भी ज़रूरी नहीं समझते हैं। अभी इन्हीं एयरलाइंस की महान सेवा का नतीजा था कि 242 यात्री एक झटके में मार दिए गए। इन एयरलाइंस की स्थिति ये है कि ग्राहक तो ग्राहक, देश के गणमान्य मंत्री तक इनके शोषण का शिकार होते रहते हैं।
लेकिन नहीं, आप इन विषयों पर नहीं बोल सकते। एयरलाइंस के अंदर की चीज़ों पर अगर बात करनी शुरू की तो कहानी ख़त्म नहीं होगी। एक पूरी फ़िल्म बन सकती है कि किस तरह से ये कंपनियाँ सेवा से अधिक खून चूसने का अड्डा बन चुकी हैं।
आर्मी ऑफिसर का गुस्सा और हमला बस ट्रेलर है, रोज़ हज़ारों यात्री इसी तरह के शोषण का शिकार हो रहे हैं। इंतज़ार करिए कब, किसका, कहाँ, कैसे गुस्सा निकलेगा।





