rahul gandhi trump USA

राहुल गाँधी: ट्रम्प के नाम पर PM मोदी को उकसाना, डीप स्टेट वाली हरकत

Summary
ट्रम्प के नाम का सहारा लेकर राहुल गाँधी पीएम मोदी को उकसाकर भारत को एक ऐसे टकराव की ओर धकेलना चाहते हैं, जो भारत के लिए नुकसानदेह हो।

Chapter 1: राहुल गांधी का बयान

बीते दिनों ऑपरेशन सिंदूर पर जब संसद में चर्चा हुई तो आप सब ने सुना होगा कि किस तरह से राहुल गांधी लगातार इस बात पर जोर दे रहे थे कि प्रधानमंत्री मोदी संसद में ट्रम्प का नाम लें। राहुल गाँधी जब ये बातें बोल रहे थे, उसी समय भारत की एक बड़ी Oil refinery कंपनी, अमेरिका की Microsoft कंपनी के खिलाफ़ दिल्ली हाई कोर्ट में गई थी।

आपको यह लग रहा होगा कि यह दोनों बातें तो बिल्कुल ही अलग-अलग है, ये तो कहीं से भी एक दूसरे से संबंधित नहीं हैं।

वास्तव में यह दोनों ही बातें एक दूसरे से जुड़ रही हैं। इस बार मामला सिर्फ बयानबाज़ी का नहीं है। राहुल गाँधी जानते हैं कि भारत फिलहाल आर्थिक या रणनीतिक मोर्चे पर अमेरिका से सीधी टक्कर नहीं ले सकता। इसलिए राहुल गाँधी पीएम मोदी को उकसाकर भारत को एक ऐसे टकराव की ओर धकेलना चाहते हैं, जो भारत के लिए नुकसानदेह हो।

Chapter 2: मोदी की रणनीति — संतुलन, आत्मनिर्भरता और धैर्य का रास्ता

वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका नीति का उद्देश्य एकदम साफ है कि भारत न किसी के आगे झुकेगा, और न ही किसी को भड़काएगा।

मोदी को पता है कि जैसे-जैसे भारत का कद बढ़ेगा वह अमेरिका को खटकता जाएगा। इसलिए मोदी अमेरिका से सीधे टकराव की बजाय भारत के विकास पर ध्यान दे रहे हैं।

यदि आप अमेरिकी दादागिरी को चुनौती देने की बात करें, तो भारत भले ही खुलकर अमेरिका के सामने नहीं आ रहा, लेकिन चुपचाप रहते हुए BRICS जैसी संस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान और विकासशील देशों के नेतृत्व के साथ भारत ने अमेरिका के विकल्प पर भी काम करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा जब पूरा यूरोप, अमेरिका के नेतृत्व में रूस पर पाबंदी लगा रहा था, तब भी भारत ने रूस से दूरी नहीं बनाई।

दरअसल अमेरिका की दादागिरी जो पूरी दुनिया में है, वह सिर्फ इसलिए है, क्योंकि एक लंबे समय से अमेरिका के पास तकनीक के क्षेत्र में संप्रभुता रही है। यही कारण है कि अमेरिका पूरी दुनिया को आंख दिखाता रहता है सिर्फ भारत को ही नहीं।

आप भारत का छोड़िये, रूस का उदाहरण देख लीजिये। युक्रेन-रूस युद्ध ने यह साफ कर दिया कि टेक्नोलॉजी अब सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि जियोपॉलिटिकल हथियार भी है।

Google, Microsoft, Meta और Amazon ने रूस को अपने प्लेटफॉर्म्स से सिर्फ इसलिए बाहर कर दिया, क्योंकि अमेरिकी सरकार रूस के खिलाफ़ खड़ी थी। ये तो प्राइवेट कंपनियाँ हैं, इनके पास न कोई अपनी एंबेसी होती है, न ही यह लोग कोई पॉलिटिकल पहचान वाले हैं, लेकिन फिर भी ये कंपनियाँ अमेरिका के पक्ष में काम करती हैं।  

Chapter 3: Nyara Case और तकनीकी संप्रभुता

ऐसे उदाहरण सिर्फ रूस तक ही सीमित नहीं रहे। बल्कि हाल ही में भारत में भी एक ऐसा ही केस आया है। वीडियो की शुरुआत में मैंने बताया था कि राहुल गांधी जब संसद में मोदी पर यह दबाव डाल रहे थे कि आप ट्रंप का नाम लीजिये, इस समय भारत की Nyara energy, दिल्ली हाई कोर्ट में गई थी।

दरअसल मुद्दा ये है कि भारत में oil refinery की एक बड़ी कंपनी है – Nyara Energy नाम है कंपनी का। अभी कुछ दिन पहले Microsoft ने अचानक ही Nyara को ब्लैकलिस्ट कर दिया। क्यों? सिर्फ इस बात पर कि इस कंपनी के रूस के साथ संबंध हैं। 

इस मामले ने बता दिया है कि अगर भारत ने खुद का स्वदेशी टेक इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनाया, तो आने वाले समय में हमारा हाल भी रूस की तरह हो सकता है।

Chapter 4: मोदी सरकार की तैयारी

इसलिए मोदी सरकार इस समय टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे रही है। भारत में बने हुए प्लेटफॉर्म को ज्यादा तवज्जो दिया जा रहा है।

Microsoft Teams जैसे communication platform के विकल्प के रूप में सरकार zoho जैसे स्वदेशी platforms को बढ़ावा दे रही है। Zoho तो सिर्फ एक नाम है, ऐसी अनेक स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स हैं, जिनको लेकर सरकार अब मुखर हो रही है।

सरकार डेटा लोकलाइजेशन पॉलिसी लेकर आई है। RuPay card और UPI जैसे पेमेंट सिस्टम्स को बड़े स्तर तक फैलाया गया है। सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया गया है, ताकि भारत में ही चिप निर्माण हो सके।

Digital Personal Data Protection Act लागू किया गया है, ताकि विदेशी कंपनियाँ भारत के क़ानून के अधीन हों। Chat Gpt के तर्ज पर BharatGPT और indigenous cloud solutions की शुरुआत की गई है। इस तरह से बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।

Chapter 5: कांग्रेस, अमेरिका और राहुल गाँधी का असली मकसद

लेकिन राहुल गांधी बस यह चाहते हैं कि भारत इन तमाम चीजों से अपना ध्यान हटाकर सीधे ट्रंप की आलोचना करें और अमेरिका से सीधी सीधी आर्थिक, राजनैतिक और रणनीतिक लड़ाई मोल ले लें।

अकबर इलाहाबादी का एक शेर है:

यह शेर राहुल गाँधी पर बिल्कुल सटीक बैठता है। राहुल गाँधी हर उस व्यक्ति, हर उस संस्था, हर उस देश के साथ हो जाते हैं, जो भारत के विरुद्ध हो।

इस बार राहुल गाँधी उस बंदर की भूमिका में आना चाहते है, जो दो बिल्लियों को आपस में लड़ाकर खुद ही रोटी खाने के फिराक में रहता है।  राहुल गाँधी जो कर रहे हैं, वह कोई बचकानी हरकत नहीं है, बल्कि बड़ी चालाकी से रची गई डीप स्टेट की स्क्रिप्ट है।

अमेरिका का डीप स्टेट भी यही चाहता है कि भारत और अमेरिका के संबंध खराब हों। और राहुल गांधी ने अपनी हरकतों से यही बताया है कि वह भी यही चाहते हैं कि भारत और अमेरिका के संबंध खराब हों। तो आखिर अमेरिका के डीप स्टेट और कांग्रेस का यह आपस में क्या रिश्ता है? यह आडंबर से भरा सवाल नहीं है, ईमानदारी से पूछ रहा हूँ।

Congress और अमेरिका के डीप स्टेट के संबंध किसी से छुपे नहीं हैं। जब भारत में संसद सत्र चलने वाली होती है तब हिडन वर्ग की कोई फर्जी रिपोर्ट लाकर संसद को डिस्टर्ब करने का प्रयास किया जाता है। जिसके लिंक बाद में राहुल गाँधी तक से जुड़ते हैं। इससे पहले राहुल गांधी के पॉलीटिकल एडवाइजर सैम पित्रोदा के लिंक भी अमेरिका के डीप स्टेट से जोड़े जा चुके हैं।

भारत जिस मजबूत राजनीतिक स्थिरता के दौर से गुजर रहा है, ऐसी स्थिति में किसी भी डीप स्टेट की भारत में सत्ता परिवर्तन करने या कराने की तो औकात नहीं है, लेकिन यह लगातार अपने किसी न किसी काम से यह प्रयास जरूर करते रहते हैं कि भारत में राजनीतिक अस्थिरता बनी रहे। 

अमेरिका का डीप स्टेट और कांग्रेस का यह जो आपसी गठबंधन है, यह पूरा गठबंधन भारत को अस्थिर करने में, और भारत-अमेरिका के संबंधो को खराब करने में जुटा हुआ है।

भारत इस समय भविष्य की सोच के साथ काम कर रहा है, क्योंकि भारत को एक तकनीकी, रणनीतिक और आर्थिक रूप से स्वतंत्र राष्ट्र बनना है। इसलिए, इस रास्ते में रोड़ा डालने वाले राहुल गाँधी जैसे लोगों को हमें पहचानना होगा, जो अपने निजी स्वार्थ के लिए देश को भी दाँव पर लगाने को तैयार हो जाते हैं।

Editorial team:
Production team:

More videos with Rohit Pandey as Anchor/Reporter