देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर चर्चा में आ गया! वो जगह जहाँ मंदिरों की घंटियाँ, शंखनाद और मंत्रों का माहौल आपको पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर देता है। पूरा वातावरण भक्ति से भरा रहता है, हर तरफ़ शांति। लेकिन इसी पवित्र भूमि से एक घटना सामने आई जो सच में चौंकाने वाली है।
17 साल की पीहू सिंह सुरकंडा माता के दर्शन को गई थीं… ये मंदिर टिहरी गढ़वाल में धनोल्टी के पास है – ये माँ भगवती के 51 शक्तिपीठों में से एक बड़ा सिद्धपीठ है।
कहते हैं कि भगवान् शिवजी जब सती माँ के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तो यहाँ माता का सिर गिरा था, तभी से नाम सुरकंडा। दर्शन के लिए लंबी पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है, जो भक्त की सच्ची परीक्षा होती है। वहाँ हमेशा बस “जय माता दी” के जयकारे गूँजते हैं, शांति ही शांति।
पीहू को भी यही उम्मीद थी – भजन-आरती और पूजा के मंत्र सुनाई देंगे। लेकिन सुरकंडा मंदिर की चढ़ाई करते वक्त कुछ लड़के जोर-जोर से “जय भीम” के नारे लगा रहे थे। पीहू ने सब कुछ अपने फ़ोन में रिकॉर्ड कर लिया। इंस्टाग्राम रील में साफ़ दिख रहा है – वो लड़के नारे लगाते ऊपर जा रहे हैं और पीहू को जानबूझकर चिढ़ाते भी निकल गए। पीहू ने अपनी हैरानी दिखाई और सवाल उठाया – इस पवित्र स्थान पर राजनीतिक नारे क्यों? किसी को deliberate तरीके से भड़काने की क्या ज़रूरत?
“जय भीम” तो एक socio-political slogan है, जबकि मंदिर पूरी तरह भक्ति का जगह है। यहाँ हर जाति-धर्म के लोग शांति से आते हैं, मन लगाते हैं और आशीर्वाद लेकर जाते हैं। अगर कोई वहाँ पार्टी वाले नारे चिल्लाएगा, तो शांति तो भंग होगी ही ना? भक्तों का पूरा मूड खराब हो जाएगा।
पीहू की रील जैसे ही वायरल हुई, उन jai bhim वाले लड़कों के सपोर्टर्स एक्टिव हो गए। वो भी वीडियो बनाकर पीहू को ऑनलाइन धमकाने लगे। लेकिन पीहू ने हिम्मत दिखाई, पीछे नहीं हटी। उसने फिर से खुलकर सवाल उठाया – कि धार्मिक स्थलों पर ऐसी नारेबाज़ी क्यों?
जो लोग हर वक़्त संविधान और डॉक्टर आंबेडकर की दुहाई देते हैं, उन्हें भी बताना चाहिए – क्या संविधान किसी को मंदिर में जाकर भड़काऊ नारे लगाने और श्रद्धालुओं को जानबूझकर परेशान करने की permission देता है? मंदिर तो सबका है, वहाँ सिर्फ़ भक्ति होनी चाहिए, राजनीति नहीं।
पीहू का सवाल बिलकुल सही है। हमें सबको सोचना चाहिए – इन पवित्र जगहों की पवित्रता बनाए रखना हमारी साझा ज़िम्मेदारी है।



