दिल्ली लाल किले के सामने 10 अक्टूबर 2025 की शाम को हुए i-20 कार धमाके की घटना को केन्द्र सरकार ने आतंकी साजिश माना है। घटना के बाद से ही फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी जाँच के घेरे में है, क्योंकि इसी यूनिवर्सिटी से तीन आतंकी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है। इतना ही नहीं बीते दिन 800 पुलिस कर्मियों ने यूनिवर्सिटी और इसके आस-पास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाकर करीब 12 लोगों को हिरासत में लिया है।
लाल किले के सामने हुए कार धमाके के बाद ऑपइंडिया की टीम फरीदाबाद के उस धौज गाँव पहुँची, जहाँ अल-फलाह यूनिवर्सिटी मौजूद है। शाम का समय था हम धौज गाँव की सबसे बड़ी मस्जिद के बाहर खड़े थे। इस दौरान हमने आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल और अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर गाँव के लोगों से बात की तो अधिकाँश लोगों ने हमारे कैमरे के सामने बोलने से बचने या फिर घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं कहकर दूरी बना ली।
कुछ लोगों ने हमसे बात की। इनमें मस्जिद के सामने अल्लाह की माला जपते हुए हाजी कासिम ने कहा, “मुझे घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है, मैं मस्जिद में रहता हूँ। हमें नहीं पता कहाँ कितने लोग मारे गए। हम सिर्फ मस्जिद में अल्लाह-अल्लाह करते हैं।”
आमीन ने कहा, “ये बहुत ही गलत हुआ है जिसने भी किया है उसे सजा मिलनी चाहिए।” आगे मस्जिद से नमाज पढ़कर निकले मोहम्मद इकबाल ने कहा, “मुझे घटना के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। मैं तो पासपोर्ट का वेरिफिकेशन कराने के लिए आया हूँ। पुलिस ने सही काम किया है। कानून अपना काम करे।”
इरफान ने कहा, “ये मामला बाहर का है हमारे यहाँ तो वह (आतंकी) डॉक्टर की नौकरी करते थे अल-फलाह यूनिवर्सिटी में। यूनिवर्सिटी ने डॉक्टर को नौकर डिग्री देखकर दी थी न कि आतंकी देखकर। इस घटना से हमारा गाँव बदनाम हुआ, हम इसके लिए शर्मिंदा हैं।”
आतंकी के नमाज पढ़ने के सवाल पर बीच में टोकते हुए एक अन्य युवक ने कहा, “धर्म अलग चीज है और आतंकवाद एक अलग चीज है। नमाज का और आतंकवाद का कोई संबंध नहीं है। इस अल-फलाह यूनिवर्सिटी से लाखों बच्चे पढ़कर निकले हैं, कभी किसी ने कोई गंदा काम नहीं किया। ये पहली घटना हुई है। इमाम साहब का कोई संबंध नहीं है वह सिर्फ मस्जिद में लोगों को नमाज पढ़ाते थे।”
पास में ही खड़े एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “डॉक्टर साहब काम तो अच्छा करते थे मरीजों को देखने का और नमाज पढ़ने का, लेकिन ये जो हादसा हुआ है इसका हमें कुछ नहीं पता।”
अगर पढ़ाई करके ही बम फोड़ना है तो पढ़ाई क्यों करना? इस सवाल पर इरफान ने कहा ,”कोई माँ-बाप आतंकी बनाने के लिए अपने बच्चों को नहीं पढ़ाता, लेकिन अब हम आगे से जम्मू-कश्मीर के लोगों पर भरोसा नहीं कर पाएँगे।”
एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “डॉक्टर (आतंकी) को पूरा इलाका जानता था। वह बढ़िया से हमारा इलाज करते थे। हमने आज तक उसके बारे में कोई बात नहीं सुनी।”
मस्जिद के सामने खडे एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “हम डॉक्टर साहब से दवा लेने के लिए जाते थे। बहुत बार मिले हैं, वो अच्छे इंसान थे। पाँच वक्त के नमाजी थे।” आपको बता दें कि धौज की इस बड़ी मस्जिद में हर रोज एक हजार से 1500 लोग नमाज के लिए आते हैं।
जिस मस्जिद में आतंकी पढ़ता था नमाज वहाँ पहुँची ऑपइंडिया की टीम
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मस्जिद में ही आतंकी मुजम्मिल पाँच वक्त की नमाज अदा करता था। कैंपस के पिछले हिस्से में मौजूद मस्जिद पर हम पहुँचे, तो मस्जिद के पास वाले मकान मालिक रहीमुद्दीन ने कहा, “वो (आतंकी मुजम्मिल) इमरजेंसी में डॉक्टर थे। यहीं नमाज पढ़ते आते थे। हम भी यहीं पढ़ते हैं। कभी ऐसा शक नहीं हुआ। हमारी सिर्फ दुआ सलाम होती थी। हमें सिर्फ इतना पता था कि वह कश्मीर के हैं।”
रहीमुद्दीन ने आगे कहा, “हम यहाँ 4 साल से रहते हैं और मस्जिद के इमाम मो. इश्तियाज यहाँ करीब 20 साल से इमाम है। ये बहुत गलत हुआ है। हमारा गाँव डॉक्टर के कारण बदनाम हो गया है। अब हम कश्मीर के किसी व्यक्ति पर भरोसा नहीं कर पाएँगे।” रहीमुद्दीन ने कहा कि इस तरह के लोगों को यूनिवर्सिटी को पनाह नहीं देनी चाहिए।
इसके बाद हमने इमाम के घर और मस्जिद को भी देखा। जानकारी मिली कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी द्वारा ही यूनिवर्सिटी स्थापना के समय ही एक एकड़ जमीन में करोड़ों की लागत से मस्जिद का निर्माण कराया गया था।
मस्जिद में इमाम मो. इश्तियाज आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल के साथ लोगों को पाँच वक्त की नमाज अदा कराता था। इस इमाम को अल-फलाह यूनिवर्सिटी द्वारा ही सैलरी दी जाती थी। इस मस्जिद में रहने वाले इमाम मो. इश्तियाज ने ही आतंकी मुजम्मिल को गाँव फतेहपुर तगा में किराए पर घर दिया था, जहाँ से पुलिस को 2563 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी।





