West Bengal UCC

पश्चिम बंगाल: UCC लागू होने के बाद रुकेगी पहचान संबंधी धांधली?

Summary
पश्चिम बंगाल में UCC इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यहां क्रॉस बॉर्डर मैरिज और अन्य कई कारणों से आइडेंटिटी रिलेट्ड फ्रॉड एक बड़ी समस्या है।

पश्चिम बंगाल में ‘बंगाल मुहम्मदान मैरिजेज एंड डिवोर्सेस रजिस्ट्रेशन एक्ट’ है। इस कानून का काम है, मुस्लिमों के निकाह और तलाक का रिकॉर्ड रखना। इसमें सरकारी मुलाजिम के तौर पर मुसलमान होता है, कहीं-कहीं वो काजी भी हो सकता है।

अब इसका केवल एक काम है, मुसलमानों को निकाह या तलाक का एक लीगल सर्टिफिकेट देना। 1876 से अब तक बंगाली मुस्लिमों के लिए यही चलता आया है लेकिन अब ये शायद खत्म होने वाला है। क्योंकि अब राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने जा रही है। 

पश्चिम बंगाल में अब मैरिज रजिस्ट्रेशन या फिर तलाक दोनों के लिए एक ही सेंट्रलाइज्ड बॉडी होगी और उसका नियम एक समान रूप से सभी पर लागू होगा चाहे वो किसी भी धर्म या मजहब से संबंध रखता हो। 

अंग्रेज़ों के वक्त का ये मुहम्मदान वाला कानून ना तो एक-एक व्यक्ति की चार-चार शादियों को रोकता है और ना ही तलाक के तरीके को और ना हलाला को।

ऐसे में जब UCC लागू होगा तो उसमें एक बार में एक से ज्यादा बीवी रखने पर पाबंदी होगी और ट्रिपल तलाक के लिए भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नियम नहीं चलेंगे… आपको उन नियमों को पालन करना होगा जिनका सभी लोग कर रहे हैं और अगर आप इसके खिलाफ जाते हैं तो UCC के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।

इसका एक एग्जाम्पल मैं आपको बताता हूं। उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद मोहम्मद दानिश ने अपनी बीवी को दहेज के नाम पर खूब प्रताड़ित किया और फिर तीन तलाक का इस्तेमाल कर तलाक दे दिया। बीवी ने साथ रहने की गुहार लगाई तो दानिश ने हलाला का दबाव बनाया। परेशान बीवी ने जब मुकदमा दर्ज कराया तो सीधा UCC के तहत कार्रवाई हुई। 

बंगाल में UCC इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यहां आइडेंटिटी रिलेट्ड फ्रॉड एक बड़ी समस्या है। पश्चिम बंगाल चूंकि बांग्लादेश के साथ बॉर्डर शेयर करता है तो यहां क्रॉस बॉर्डर मैरिज के जरिए पहचान का संकट और ज्यादा पैदा होता है? 

मैरिज रजिस्ट्रेशन का तो हमनें आपको बताया ही कि मुहम्मदान मैरिजेज के अंदर ये सब होता है वहीं से सर्टिफिकेट मिलता है और वो कितना पुख्ता होगा। ये आप इस बात से समझिए कि जिस राज्य में फर्जी आधार कार्ड, वोटर कार्ड और यहां तक कि इनके बेस पर पासपोर्ट तक बना दिए जाते हैं तो यहां पहचान कितनी बड़ी समस्या होगी आप इस बात को समझिए।

इसलिए राज्य के सभी नागरिकों के लिए मैरिज रजिस्ट्रेशन, डिवॉर्स रजिस्ट्रेशन, बर्थ रिकॉर्ड, किसी को गोद लेने या फिर विरासत को लेकर एक समान नियम होने आवश्यक हैं क्योंकि रिकॉर्ड एक ही जगह पर होंगे और पहचान भी समान नियमों के आधार पर होगी तो उसमें धांधली की आशंकाएं कम होंगी, एक सही डेटा और बेटर डॉक्यूमेंटेशन होगा।

इसके अलावा, यूसीसी के और भी कई नियम होंगे जैसै उत्तराखंड में हैं, लिव इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन या बेटे-बेटी को संपत्ति में समान अधिकार। 

हालांकि, बंगाल यूसीसी का फाइनल ड्राफ्ट आना बाकी है तो असल स्थिति बाद में ही पता चलेगी लेकिन इतना तय है कि बंगाल के लिए यूसीसी बेहद जरूरी है और राज्य की शुभेंदु सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध दिख रही है।

Editorial team:
Production team:

More videos with Jayesh Matiyal as Anchor/Reporter